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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. गम्हरिया प्रखंड के चामारू पंचायत अंतर्गत चामारू, रांगामाटिया, नूतनडीह और नेंग्टासाय गांवों के ग्रामीणों द्वारा सार्वजनिक शिव पूजा समिति के तत्वावधान में पारंपरिक चड़क पूजा का भव्य आयोजन किया गया. अनुष्ठान में हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर आस्था प्रकट की. चिलचिलाती धूप के बीच आयोजित भोक्ता टांगा अनुष्ठान आकर्षण का केंद्र बना रहा.
पूजा के दौरान गांव के भोक्ताओं ने अपनी पीठ में कील घोपकर करीब 30 फीट ऊंचे लकड़ी के खंभे में झूलते हुए अद्भुत आस्था और तपस्या का प्रदर्शन किया. आयोजन समिति के सदस्य सह ग्राम प्रधान प्रभात रंजन महतो ने बताया कि चामारू में राजा के शासनकाल से चड़क पूजा की परंपरा चली आ रही है.
श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के कारण प्रतिवर्ष यहां करीब तीन हजार लोग पहुंचते हैं. आयोजन के दौरान सरायकेला थाना की पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था में सक्रिय रही.
भोक्ता की रस्सी छूने उमड़ी भीड़
अनुष्ठान के दौरान जिस खंभे में भोक्ता झूल रहे थे, उसकी रस्सी पकड़ने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गयी. ग्रामीण बुजुर्गों के अनुसार इस रस्सी को छूना शुभ माना जाता है और इससे परिवार में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है.
छऊ मुखौटों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण
कार्यक्रम स्थल पर शिव मंदिर के समक्ष छऊ नृत्य में उपयोग होने वाले विभिन्न शैली के मुखौटों की प्रदर्शनी भी लगायी गयी. आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि आधुनिक दौर में युवाओं का लोक संस्कृति से जुड़ाव कम होता जा रहा है. इसी उद्देश्य से नई पीढ़ी को अपनी परंपरा और संस्कृति से परिचित कराने के लिए प्रतिवर्ष मुखौटा प्रदर्शनी आयोजित की जाती है.
450 पाठ भोक्ताओं ने निभायी परंपरा
शनिवार शाम मुख्य पाठ भोक्ता परवेंदू महतो के नेतृत्व में पुजारी नेपाल बनर्जी, स्नेहाशीष बनर्जी और कीर्तन महतो के मार्गदर्शन में पूजा-अनुष्ठान की शुरुआत हुई. पंचायत के चारों गांवों से करीब 450 पाठ भोक्ता लगभग तीन किलोमीटर दूर संजय नदी से पदयात्रा कर मंदिर पहुंचे. स्नान के बाद सभी श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में फलाहार ग्रहण किया.
रातभर चला छऊ नृत्य कार्यक्रम
जागरण रात्रि के अवसर पर रातभर छऊ नृत्य का आयोजन किया गया. इसमें स्थानीय चार छऊ दलों ने भाग लिया. कलाकारों ने पौराणिक कथाओं पर आधारित प्रस्तुति देकर ग्रामीणों का भरपूर मनोरंजन किया.
सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है चड़क पूजा : विधायक
रविवार को आयोजित कार्यक्रम में पहुंची विधायक सविता महतो ने कहा कि चड़क पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, परंपरा और सामूहिक आस्था का प्रतीक है. ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का कार्य करते हैं. उन्होंने आयोजन समिति और ग्रामीणों की एकजुटता की सराहना करते हुए सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की.
