मनमानी के आरोप में बोड़ पीड़ पारगना निष्कासित, विशेष बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय, मोड़े माझी को सौंपी गई संचालन की जिम्मेदारी

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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. गम्हरिया स्थित संथाल सरना उमूल सभागार में रविवार को स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों की विशेष बैठक मोड़े माझी जोगेंद्र मार्डी, देव मार्डी, राजेन माझी, सुरेश हांसदा और भोगेन मार्डी की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित की गई. बैठक में सिंञ दिशोम बोड़ पीड़ पारगना राजेश टुडू के कार्यशैली और स्वशासन व्यवस्था के संचालन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई.

बैठक के दौरान माझी बाबा जोगेंद्र मार्डी ने कहा कि पांच जून 2025 को राजेश टुडू की बोड़ पीड़ पारगना के रूप में ताजपोशी हुई थी. इसके बाद स्वशासन व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए बुद्धिजीवियों और युवाओं को शामिल कर एक समिति का गठन किया गया था, जिसे कुछ ही महीनों में भंग कर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके अलावा भी कई ऐसे निर्णय और कार्य किए गए जो समाज और स्वशासन व्यवस्था के हितों के प्रतिकूल थे.

प्रतिनिधियों ने बताया कि इस संबंध में कई बार बैठक बुलाकर पारगना से स्पष्टीकरण लेने का प्रयास किया गया, लेकिन न तो वे बैठकों में शामिल हुए और न ही किसी प्रकार का जवाब दिया. इसके बाद आयोजित विशेष बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए अगले आदेश तक बोड़ पीड़ पारगना राजेश टुडू को पद से निष्कासित करने का फैसला लिया गया. साथ ही स्वशासन व्यवस्था का संचालन फिलहाल मोड़े माझी द्वारा किए जाने का निर्णय लिया गया.

बैठक में सोखेन हेंब्रम, गुलिया बेसरा, रवि हांसदा, विक्रम मुर्मू, करण किस्कू, भोजो मार्डी, लोकेश्वर टुडू, शंभू टुडू, अर्जुन मुर्मू, कालीपद हेंब्रम, काश्मीर टुडू, गणेश टुडू, अनंत कुमार मुर्मू, सुरेंद्र टुडू समेत कई प्रतिनिधि उपस्थित थे.

समिति के माध्यम से बनाया जाता था दबाव : राजेश टुडू
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बोड़ पीड़ पारगना राजेश टुडू ने कहा कि ताजपोशी के बाद व्यवस्था के सफल संचालन के लिए समिति का गठन किया गया था. हालांकि समिति से जुड़े कुछ लोगों द्वारा निजी स्वार्थ के लिए गलत कार्य करने का दबाव बनाया जाने लगा. उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों का विरोध करने के कारण उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि उचित समय पर सभी आरोपों और बिंदुओं पर विस्तार से जवाब दिया जाएगा.

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