वनवासी टिप्पणी के विरोध में उबला आदिवासी समाज, नेताओं के पुतले फूंके, कहा- आदिवासी पहचान और अस्मिता से कोई समझौता नहीं

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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. आदिवासी समुदाय को ‘वनवासी’ कहे जाने तथा सरना और सनातन को एक बताने संबंधी बयानों के विरोध में रविवार को स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों ने ऊषा मोड़ पर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया. मोड़े माझी के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, झारखंड भाजपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा तथा पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक चंपाई सोरेन का पुतला दहन किया गया.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट पहचान, संस्कृति, परंपरा और इतिहास है. उन्हें वनवासी कहकर संबोधित करना उनकी अस्मिता और संवैधानिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास है, जिसे समाज किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा. वक्ताओं ने कहा कि ‘आदिवासी’ शब्द उनकी मूल पहचान का प्रतीक है और इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी समाज के सम्मान, अधिकार और पहचान की रक्षा के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा. साथ ही संबंधित नेताओं से आदिवासी समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने और इस प्रकार की शब्दावली के प्रयोग से बचने की मांग की गई. प्रदर्शन के दौरान आदिवासी एकता और पहचान की रक्षा के समर्थन में नारेबाजी भी की गई.

कार्यक्रम में जोगेंद्र मार्डी, देव मार्डी, राजेन माझी, सुरेश हांसदा, भोगेन मार्डी, भोमरा माझी, लक्ष्मण हांसदा, कोंदा बेसरा, शंभू टुडू समेत स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधि एवं समाज के लोग उपस्थित थे.

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