ओलचिकी जयंती पर गम्हरिया में सांस्कृतिक जागरण का महाआयोजन, भाषा-संस्कृति बचाने का लिया संकल्प

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कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि

सरायकेला-खरसावां, झारखंड. संथाल सरना उमूल गम्हरिया में ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा पंडित रघुनाथ मुर्मू की तस्वीर पर श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया.

इस आयोजन का नेतृत्व आयोजन समिति के संयोजक गौरी माझी तथा अकिल आहला ओल इतुन आसड़ा, ऊपरबेड़ा, सालडीह, मुर्गाघुटू, सालमपाथर व खूंचीडीह सेंटर के ओलचिकी शिक्षकों द्वारा किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे.

मौके पर दुगनी पीड़ पारगना दिवाकर सोरेन ने कहा कि वर्तमान समय में ओलचिकी लिपि की आवश्यकता संथाली भाषा को सुदृढ़ और अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा का संपूर्ण विकास बिना लिपि के संभव नहीं है.

कार्यक्रम को कदमा के माझी बाबा बिंदे सोरेन, पीड़ पुरधुल सोखेन हेंब्रम, माझी बाबा देव मार्डी, जयराम मुर्मू, बुद्धेश्वर माझी, बागू मार्डी, करण किस्कू, शंकर सोरेन, समाजसेवी भुगलू सोरेन, शिक्षक हेमंत मार्डी सहित विभिन्न गांवों के स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया.

आयोजन समिति के सदस्य राम हांसदा ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के लोगों को अपनी लिपि, भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूक करना तथा सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाना है. साथ ही नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने और ओलचिकी लिपि के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया.

इस दौरान समाज के मैट्रिक एवं इंटर के टॉपर विद्यार्थियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में सक्रिय सदस्यों को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य, गीत और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया. वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं के सहयोग से कार्यक्रम को सफल बनाया गया.

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