काला धान की खेती से सालमपाथर के किसान शंकर मार्डी को मिली पहचान, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी व मुखिया ने की सराहना

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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. कृषि कार्य में कुछ अनोखा करने के जज्बे ने गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत बुरूडीह पंचायत के सालमपाथर निवासी शंकर मार्डी को एक अलग पहचान मिल गयी. शंकर सामान्य धान के साथ-साथ इस वर्ष काला धान की भी खेती शुरू की है. इससे क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान बन गयी है.

उन्होंने कहा कि फिलहान उनके द्वारा प्रयोग के तौर पर तीन खेत में उपजाया जा रहा है, जिसका परिणाम साकारात्मक दिख रहा है. अगला साल से अधिकांश खेतों में लगाने का प्रयास करेंगे. वहीं ग्रामीणों को भी प्रेरित करेंगे.

सोशल मीडिया में देखकर कृषि देख मिली प्रेरणा
श्री मार्डी ने बताया कि जुलाई माह में सोशल मीडिया में वे काला धान की खेती को देखा. उसके बाद उन्हें भी कुछ अलग करने को लेकर उक्त कृषि की प्रेरणा मिली.

इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन के माध्यम से बीज मंगाकर खेत में बोआइ किया. उन्होंने बताया कि उनके द्वारा अगस्त में बीज की बोआइ की थी, जो फिलहाल पकने लगा है. उन्होंने कहा कि सोहराय के बाद काला धान की कटाई शुरू कर देंगे.

समय के साथ कृषि क्षेत्र में परिवर्तन करना जरूरी : बीसीइओ
बीसीइओ सुनील कुमार चौधरी ने श्री मार्डी के पहल की सराहना की. उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ हर क्षेत्र में परिवर्तन जरूरी है. सामान्य धान की खेती के साथ-साथ अगर किसान काला धान की भी खेती करना शुरू करते है तो अपने क्षेत्र की पहचान बनेगी.

हर किसान को प्रेरित करने की जरूरत : बीएओ
प्रभारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी मलय दास ने कहा कि किसानों को हर नये तकनीक को प्रयोग करके देखनी चाहिए. श्री मार्डी के प्रयोग से अन्य किसानों को भी प्रेरणा लेकर इसकी खेती शुरू करनी चाहिए, ताकि हमारा प्रखंड धान की खेती में एक अलग पहचान बनाकर राज्य व देश में नाम रौशन करे. किसान आगे आये तो काला धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए पहल किया जायेगा.

पंचायत के लिए गर्व की बात : मुखिया
बुरूडीह पंचायत की मुखिया संगीता कुमारी ने कहा कि गम्हरिया प्रखंड क्षेत्र के बुरूडीह पंचायत में काला धान की खेती शुरू किया जाना पंचायत के लिए गर्व की बात है.

श्री मार्डी द्वारा निजीस्तर पर बीज मंगाकर इसकी कृषि करना सराहनीय पहल है. विभागीय अधिकारियों से मिल सरकारी स्तर पर किसानों को काला धान का बीज उपलब्ध कराने की मांग की जायेगी, ताकि प्रखंड के अन्य किसान भी इसकी कृषि कर सके.

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