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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां सरकार और प्रशासन प्लास्टिक मुक्त समाज तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, वहीं गम्हरिया प्रखंड की एक सरकारी योजना की बदहाल स्थिति जमीनी हकीकत को उजागर कर रही है. प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में लाखों रुपये खर्च कर निर्मित प्लास्टिक अपशिष्ट भंडारण इकाइयां अपने मूल उद्देश्य से भटककर उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार होती जा रही हैं.
ताजा मामला नुवागढ़ पंचायत के नुवागढ़ गांव का है. यहां खरकई नदी के समीप ओबीसी स्कूल के पास प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित भंडारण के लिए बनाई गई प्लास्टिक वेस्ट स्टोरेज यूनिट निर्माण के महज छह माह के भीतर ही जर्जर होने लगी है. शेड की दीवारें उखड़ रही हैं और पूरी संरचना बदहाल नजर आ रही है. इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता तथा निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.
जानकारी के अनुसार 15वें वित्त आयोग मद से सितंबर 2025 में करीब 2.34 लाख रुपये की लागत से इस इकाई का निर्माण कराया गया था. योजना का उद्देश्य पंचायत क्षेत्र से एकत्रित प्लास्टिक कचरे का सुरक्षित संग्रहण एवं वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित करना था. लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद इसकी स्थिति खराब हो गई है. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण इतनी कम अवधि में ही भवन क्षतिग्रस्त होने लगा.
स्थानीय लोगों के अनुसार प्लास्टिक कचरे के भंडारण के लिए बनाई गई यह इकाई अब असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है. शाम होते ही यहां शराब पीने वालों का जमावड़ा लगने लगता है. शेड के अंदर शराब की खाली बोतलें, प्लास्टिक गिलास और अन्य कचरा बिखरा रहता है. इससे न केवल योजना का उद्देश्य विफल हो रहा है, बल्कि आसपास का वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के नाम पर बड़ी राशि खर्च की जाती है, लेकिन इन योजनाओं के संचालन और रखरखाव की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है. कई स्थानों पर बने ऐसे केंद्र या तो बंद पड़े हैं या फिर उनका उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा है. ऐसे में सरकारी धन के उपयोग और योजनाओं की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामने आई यह स्थिति दर्शाती है कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में गंभीर खामियां मौजूद हैं. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने तथा प्लास्टिक अपशिष्ट भंडारण इकाई को पुनः उपयोगी बनाने की मांग की है.
शराबियों के जमावड़े से ग्रामीण परेशान : मुखिया
नुवागढ़ पंचायत के मुखिया सुकदेव सरदार ने बताया कि सार्वजनिक शेड के अंदर शराब पीने से रोकने के लिए कई बार लोगों को समझाया गया, लेकिन वे मानने के बजाय बहस करने लगते हैं. उन्होंने कहा कि इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को भी दी गई है. इसके बावजूद वहां शराबियों का जमावड़ा जारी है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है. उन्होंने प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई की मांग की है.
