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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. मानसून के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि की संभावना को देखते हुए उपायुक्त सरायकेला-खरसावां नितिश कुमार सिंह ने जिलेवासियों से सतर्कता बरतने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि सर्पदंश एक चिकित्सीय आपात स्थिति है, लेकिन यदि समय पर सही प्राथमिक उपचार और त्वरित अस्पताल पहुंच सुनिश्चित हो, तो जीवन बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्पदंश से बचाव व उपचार हेतु जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. आमजन को इस विषय में भ्रमित होने के बजाय सही जानकारी अपनाने की आवश्यकता है.

सर्पदंश होने पर क्या करें
✔ सर्पदंश होने पर व्यक्ति को शांत एवं स्थिर रखें।
✔ धीरे-धीरे साँप से दूरी बनाएं।
✔ घाव वाले अंग को स्थिर रखें (न हिलाएं)।
✔ यदि घाव पर आभूषण, जूते, घड़ी या टाइट कपड़ा हो तो तुरंत हटाएं।
✔ पीड़ित को नज़दीकी अस्पताल में तुरंत ले जाएं।
✔ साँस लेने में कठिनाई हो तो पीठ के बल लिटाकर गर्दन सीधी रखें।
सर्पदंश होने पर क्या न करें
❌ घबराएं या अनावश्यक दबाव न डालें।
❌ साँप को मारने या पकड़ने की कोशिश न करें।
❌ घाव को काटें, चूसें या केमिकल/औषधि न लगाएं।
❌ घाव को कसकर न बांधें।
❌ पारंपरिक या अप्रमाणित तरीकों का सहारा न लें।
सर्पदंश से बचाव के लिए सुझाव
अंधेरे स्थानों पर चलने से पहले टॉर्च का उपयोग करें.
खेतों या झाड़ियों में काम करते समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें.
रात्रि में खुले में न सोएं, मच्छरदानी का उपयोग करें.
उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की है कि ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, अफवाहों से बचें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें. जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग सर्पदंश के इलाज हेतु पूरी तरह से सतर्क और तैयार है.
आपातकालीन सहायता हेतु कॉल करें: ☎️ 15400
