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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. कांड्रा लैंपस से ऋण लेकर नहीं चुकाने वालों के खिलाफ एक बार फिर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. ऋणधारकों को ऋण चुकाने को लेकर बार-बार आग्रह करने के बाद भी राशि जमा नहीं करने की वजह से अब लैम्पस को प्रशासन का सहारा लेना पड़ गया है. इसके तहत गम्हरिया, सरायकेला, कांड्रा, आदित्यपुर व आरआइटी थाना क्षेत्र के 90 ऋणधारकों की सूची तैयार कर बॉडी वारंट जारी निकालने की तैयारी चल रही है. लैम्पस द्वारा की जा रही उक्त कार्रवाई की सूचना से अन्य बकायेदारों में हड़कंप मच गयी है.
201 ऋणधारकों का 1.62 करोड़ है बकाया
बीसीइओ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि कांड्रा लैम्पस के 201 लाभुकों के बीच एक करोड़ 62 लाख 59 हजार रुपये बकाया है. इसमें सबसे अधिक करीब राशि दस लाख रुपये है. अत्यधिक राशि वाले वैसे 90 ऋणधारकों जिनका पैसा दस वर्ष से बकाया है. उनकी सूची तैयार की गयी है, जिनका बॉडी वारंट निकाला जायेगा. उन्होंने बताया कि पूर्व में भी नौ लोगों के खिलाफ बॉडी वारंट निकाल कार्रवाई की गयी है.
दस मई से दस जून तक चलेगा वन टाइम सेटलमेंट अभियान
श्री चौधरी ने बताया कि ऋणधारकों के लिए विभाग की ओर से योजना शुरू की जा रही है. इसके तहत दस मई से दस जून तक वन टाइम सेटलमेंट अभियान चलाया जायेगा. अभियान के दौरान राशि चुकाने वालों को सूद में छूट दी जायेगी. वहीं बॉडी वारंट के लिस्ट में शामिल ऋणधारक पैसा जमा करने पर जेल जाने से बचेंगे.
वर्षों से ऋण लेकर चुकाने में करते रहे आनाकानी
बीसीइओ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि कुछ समय में राशि जमा करने के शर्त पर कुछ खाताधारियों द्वारा लैम्पस से ऋण ली गयी, लेकिन करीब 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी ऋण चुकाने में रूचि नहीं दिखा रहे है. ऋण चुकाने को लेकर लैम्पस की ओर से कई बार थोड़ी-थोड़ी राशि जमा कर ऋण चुकाने का आग्रह भी किया गया. इसके बाद भी उनके द्वारा ऋण की राशि जमा नहीं कराया गया. अंततः लैम्पस को प्रशासन से मदद लेने को विवश होना पड़ा.
अपनी जमापूंजी निकालने को लगाना पड़ रहा चक्कर
पूर्व में मजदूर वर्ग समेत आम जनता अपनी मेहनत की कमाई को जमा रखने के लिए लैम्पस को सुविधाजनक मानते थे. इसको लेकर अधिकांश ग्रामीण लैम्पस में ही अपनी कमाई को रखा करते थे, जिसे लैम्पस द्वारा ऋण के रूप में दिया गया. इसके बाद ऋणधारक अपना ऋण राशि चुकाने में आनाकानी करने लगे. इसकी वजह से लैम्पस में राशि का अभाव हो गया. अब लैम्पस की स्थिति ऐसी हो गयी है कि खाताधारियों को अपनी ही जमा पूंजी वापस लेने के लिए लैम्पस का चक्कर लगाना पड़ रहा है.
