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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. गम्हरिया स्थित संथाल सरना उमूल परिसर में आदिवासी सोशियो-एजुकेशनल एंड कल्चरल एसोसिएशन (आसेका) की ओर से जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. शिविर में आदिवासी समाज के छात्र-छात्राओं को अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया.
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षक शकुंतला सोरेन एवं लक्ष्मी मार्डी ने प्रतिभागियों को मातृभाषा के महत्व तथा सांस्कृतिक विरासत की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से होती है. इसलिए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना आवश्यक है.
प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को ओलचिकी लिपि की विशेषताओं तथा उसके संरक्षण के महत्व से भी अवगत कराया. साथ ही उन्हें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया.
शिविर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक परिधान में भाग लिया और प्रशिक्षण प्राप्त किया. कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों में अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति उत्साह देखने को मिला.
