सीतारामपुर डैम की बदहाल स्थिति पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, निगरानी समिति का गठन

खबरों से जुड़े रहने के लिए click करें
https://www.dainiksamvadbharatlive.co.in

दैनिक संवाद भारत अब TELEGRAM चैनल पर भी उपलब्ध https://t.me/dainiksamvadbharat

दैनिक संवाद भारत अब WHATSAPP चैनल पर भी उपलब्ध https://whatsapp.com/channel/0029VaATLkl4SpkMKpCec729

दैनिक संवाद भारत अब PINTEREST में भी उपलब्ध
https://pin.it/6HYuhQA

दैनिक संवाद भारत WHATSAPP GROUP से जुड़ने के लिए
https://chat.whatsapp.com/JJVqmqMRcDSBg6xl4qFYim

दैनिक संवाद भारत FACEBOOK से जुड़ने के लिए https://www.facebook.com/profile.php?id=100082944153253

दैनिक संवाद भारत FACEBOOK PAGE से जुड़ने के लिए
https://www.facebook.com/profile.php?id=100083330981312

सिर्फ QR CODE स्कैन करें और site में प्रवेश करें

इसे भी पढ़े : बुरूडीह पंचायत पहुंचीं डीडीसी, योजनाओं की समीक्षा कर महिलाओं को स्वरोजगार के लिए किया प्रेरित

सरायकेला-खरसावां, झारखंड. उचित देखरेख और पुलिस की नियमित गश्ती के अभाव में सीतारामपुर डैम की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है. ग्रामीणों द्वारा कई बार प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और डैम क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. डैम क्षेत्र में शराबियों का जमावड़ा भी दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है.

इसी मुद्दे को लेकर यशपुर पंचायत के पूर्व उपमुखिया अर्जुन माझी की अध्यक्षता में डैम तट पर ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई. बैठक में डैम की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया गया. इसके तहत सीतारामपुर डैम विस्थापित सह निगरानी समिति का गठन किया गया. समिति में अर्जुन माझी को अध्यक्ष, मंगल महतो को सचिव तथा राजेश महतो को कोषाध्यक्ष बनाया गया. साथ ही अगली बैठक में समिति का विस्तार करने की घोषणा की गई.

शराबियों के जमावड़े से महिलाएं परेशान
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि डैम क्षेत्र में दिन के समय भी शराब पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता है. आसपास के गांवों की महिलाएं स्नान और अन्य घरेलू कार्यों के लिए डैम पर पहुंचती हैं, लेकिन शराबियों की मौजूदगी के कारण वे असहज और असुरक्षित महसूस करती हैं. कई स्थानों पर युवकों के समूह खुलेआम शराब का सेवन करते हैं, जिससे महिलाओं को परेशानी होती है.

ग्रामीणों ने बताया कि शराब पीने के बाद बोतलें डैम परिसर में ही छोड़ दी जाती हैं. वर्तमान में डैम के आसपास बड़ी संख्या में खाली और टूटी हुई शराब की बोतलें बिखरी हुई हैं. इससे किसी भी समय दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है.

विस्थापितों की समस्याओं पर बनी आंदोलन की रणनीति
बैठक में सीतारामपुर डैम परियोजना से प्रभावित विस्थापित परिवारों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई. ग्रामीणों ने कहा कि जलाशय निर्माण के लिए उनकी बड़ी मात्रा में कृषि योग्य भूमि अधिग्रहित की गई थी, लेकिन बदले में न तो जमीन उपलब्ध कराई गई और न ही रोजगार दिया गया.

सदस्यों ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर पूर्व में कई बार आंदोलन किया गया, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला. बैठक में विस्थापितों के अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की रणनीति तैयार की गई. बैठक में सुरेश हेंब्रम, राहुल महतो, अमृत महतो, रमेश महतो, हीरालाल महतो, संदीप महतो समेत कई ग्रामीण उपस्थित थे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!