डुंगरीकुली के एकमात्र तालाब को बचाने के लिए महिलाओं ने किया प्रदर्शन, कार्रवाई नहीं होने पर स्वयं कदम उठाने की चेतावनी

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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. छोटा गम्हरिया पंचायत के डुंगरीकुली स्थित तालाब में गंदा पानी छोड़े जाने और मछली पकड़ने के दौरान पानी को दूषित किए जाने के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश रविवार को खुलकर सामने आया. तालाब की स्थिति को लेकर महिलाओं ने तालाब परिसर में प्रदर्शन कर विरोध जताया और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की.

प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने तालाब में गंदा पानी बहाने तथा मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पांच दिनों का अल्टीमेटम दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण अपने स्तर पर कार्रवाई करने को बाध्य होंगे.

गांव के सामाजिक जीवन का केंद्र है तालाब
ग्रामीणों ने बताया कि डुंगरीकुली का यह तालाब गांव का एकमात्र प्रमुख जलस्रोत है. ग्रामीण यहां स्नान करने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं. ऐसे में तालाब का प्रदूषित होना पूरे गांव के लिए चिंता का विषय बन गया है.

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग अपने घरों का गंदा पानी सीधे तालाब में बहा रहे हैं. इसके अलावा मछली पकड़ने की गतिविधियों के कारण भी पानी दूषित हो रहा है. इससे तालाब की स्वच्छता और उपयोगिता प्रभावित हो रही है.

विरोध करने पर मिलती है धमकी
ग्रामीणों ने बताया कि जब भी वे तालाब को प्रदूषित करने वाली गतिविधियों का विरोध करते हैं, तो उन्हें धमकियां दी जाती हैं. इसी कारण अब गांव की महिलाओं ने एकजुट होकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है और तालाब को बचाने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया है.

प्रदर्शन में पुष्पा मुर्मू, कपूरा मुर्मू, बेबी सरदार, पूजा किस्कू, बासो टुडू, धानी हांसदा, मायनो सोरेन, सरस्वती हांसदा, सीता सरदार, मैना सरदार, लक्खी हांसदा, ललिता सरदार, बुधनी हांसदा, दुनानी सरदार, छोटी सरदार, तिलक मुर्मू, रविवारी कुमारी, अनिता हांसदा, दुखनी लोहार, मंगली सरदार, लक्खीमनी सरदार, उर्मिला टुडू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे.

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