पगड़ी रस्म कार्यक्रम में जुटे 80 गांव के ग्रामीण, समारोहपूर्वक हुई बोड़पीड़ पारगाना राजेश टुडू की ताजपोशी, बोले वक्ता भाषा-संस्कृति की रक्षा को आगे आये समाज के युवा : फकीर

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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. गम्हरिया प्रखंड के दुग्धा पंचायत अंतर्गत स्वरूपडीह में पगड़ी रस्म (दाहड़ी चाल) सह ताजपोशी कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें माझी पारगाना महल सिंञ दिशोम आदिवासी पारंपारिक स्वशासन व्यवस्था (संथाल समाज) गम्हरिया के बोड़ पीड़ पारगाना नियुक्त राजेश टुडू को देश पारगाना फकीर मोहन टुडू ने पगड़ी पहनाकर पदभार दिलाया. इसके पश्चात विधिवत रूप से पूजा-अर्चना कर श्री टुडू को बोड़ पीड़ पारगाना पद की शपथ दिलायी गयी. इससे पूर्व कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों ने श्री टुडू को गाजे-बाजे के साथ उनके घर से कार्यक्रम स्थल लाया गया, जहां मौजूद करीब 70 गांव के माझी बाबाओं ने पारंपारिक रीति-रिवाज से श्री टुडू का स्वागत किया गया.

देश पारगाना श्री टुडू ने कहा कि गम्हरिया बोड़ पीड़ के पारगना नंदलाल टुडू को बर्खाश्त किये जाने के बाद पारगना का पद रिक्त था, जिस पर समाज के युवा राजेश टुडू को मनोनीत कर पगड़ी रस्म की प्रथा पूरी की गयी. उन्होंने कहा कि अपनी भाषा, कला व संस्कृति की रक्षा करना हमारे लिए चुनौती बन गयी है. इसे बचाकर रखने को जागरूकता जरूरी है. उन्होंने अपनी भाषा-संस्कृति की रक्षा के लिए युवाओं को आगे आने की अपील की.
इन अतिथियों ने भी किया कार्यक्रम को संबोधित
दुगनी पीड़ पारगाना दीवाकर सोरेन, खिजुरदा पीड़ पारगाना सुरेश टुडू, पोड़ाहाट पीड़ पारगाना आकाश हांसदा, आनंदपुर पीड़ पारगाना अनिल सोरेन, सारंडा पीड़ पारगाना रूईदास सोरेन, बोड़ पीड़ कारजी बाबा लश्कर टुडू, दिशोम पुरथुल बुराम माझी, सोखेन हेंब्रम व कमल हांसदा, दुगनी पीड़ पोराणिक बबलू मुर्मू, चोड़ा माझी बाबा राजेश हांसदा, हाड़ुडी माझी होपोन सुखराम टुडू व खूचीडीह जोग होपन भागवत बास्के.
पंचायत स्तर पर ओलचिकी विद्यालय संचालन के लिए होगी पहल
अतिथियों ने कहा कि समाज के बच्चों में शिक्षा को बढ़ावा देकर शिक्षित समाज का निर्माण करना हमारा लक्ष्य है. हमारा लिपि ओलचिकी है, लेकिन समाज के अधिकांश लोग ओलचिकी से अंजान है.

समाज के लोगों में शिक्षा को बढ़ावा देने तथा वाद्य यंत्रों की जानकारी समेत ओलचिकी की पढ़ाई के लिए प्रत्येक पंचायत में ओलचिकी का आसड़ा (विद्यालय) निर्माण कराने को लेकर पहल किया जायेगा, ताकि समाज के लोग अपनी लिपि से अवगत हो सके.

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