महिला रोजगार सेवक की मां का निधन, पुत्र नहीं होने पर बेटी ने मुखाग्नि देकर निभाया संतान होने का फर्ज

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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. मौजूदा दौर में बेटा-बेटी मेंं अब फर्क नहीं रहा, जो काम बेटा कर सकता है. वही काम बेटी भी कर सकती हैं. काम चाहे घर का हो या घर की चारदीवारी से बाहर का. ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है गम्हरिया प्रखंड की बुरूडीह पंचायत के बड़ामारी की बेटी बबिता कुमारी ने. गम्हरिया प्रखंड में रोजगार सेवक के रूप में कार्यरत बबिता ने सामाजिक बंधनों से मुक्त होकर संतान होने का फर्ज निभाते हुए अपनी मां को मुखाग्नि दी.

जानकारी के अनुसार बड़ामारी निवासी अधिवक्ता शिव प्रसाद महतो की पत्नी पारूल महतो (66) का निधन गुरूवार को हुआ. स्व महतो कुछ वर्ष से बीमार चल रही थी. वे अपने पीछे पति समेत दो पुत्री छोड़ गयी. बड़ी पुत्री रोजगार सेवक व छोटी पुत्री नर्स है. पुत्र नहीं होने की वजह सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए बड़ी पुत्री बबिता महतो ने मां को मुखाग्नि देकर संतान होने का फर्ज निभाया.

इससे पूर्व घटना की सूचना पाकर झामुमो जिलाध्यक्ष डॉ शुभेंदू महतो, प्रधानमंत्री कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किसान सोखेन हेंब्रम, पूर्व मुखिया लाल मोहन महतो, सेवानिवृत प्रोफेसर कृष्ण मोहन महतो, मुनेश्वर महते, देवलाल महतो, शिवराम महतो, प्यारेलाल महतो समेत कई समाजसेवी व जनप्रतिनिधि बड़ामारी पहुंच पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. साथ ही अंतिम-संस्कार में शामिल हुए.

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