सरायकेला-खरसावां, झारखंड. विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गयी है. लोग प्रत्याशियों के हार-जीत पर टिप्पणी करते हुए हार के लिए कहां चूक हुई इस पर भी समीक्षा शुरू कर दी है. हालांकि इस बार विधानसभा चुनाव में सरायकेला सीट से चुनाव परिणाम अजब-गजब रहा. वोट के आंकड़े ऐसे आये कि अब झामुमो प्रत्याशी गणेश महाली या कार्यकर्ता यह भी नहीं कह सकते है कि निर्दलीय प्रत्याशियों की वजह से उनकी हार हुई है, क्योंकि निर्दलीय प्रत्याशियों द्वारा प्राप्त किये गये सभी वोट व नोटा में पड़े वोट भी गणेश महाली को मिलता तो भी 9160 वोट से झामुमो प्रत्याशी की हार होती. आंकड़ों के अनुसार गणेश महाली गीता भाजपा प्रत्याशी चंपाई सोरेन से 20447 मतों से हार गये. पूरे सरायकेला सीट से गणेश महाली को 98932 मत प्राप्त हुए, जबकि नोटा व निर्दलीय प्रत्याशी को कुल 11287 मिले. निर्दलीय व नोटा का वोट भी अगर गणेश महाली को ही मिल जाता तो गणेश महाली का कुल मत 110219 हो जाता, जबकि चंपाई सोरेन को कुल 119379 मत प्राप्त हुआ है. इस प्रकार से फिर भी गणेश महाली 9160 मतों से हार जाते.
अब तक की सबसे बड़ी जीत : झारखंड स्थापना के बाद सरायकेला में अब तक की सबसे बड़े अंतर में इस वर्ष चंपाई सोरेन ने जीत हासिल की है. इसके पूर्व वर्ष 2000 में अनंतराम टुडु (भाजपा): 49333 चंपाई सोरेन(झामुमो) 40550, अंतर : 8783. वर्ष 2005 में चंपाई सोरेन (झामुमो) 61112, लक्ष्मण टुडु (भाजपा) 60230, अंतर : 882. वर्ष 2009 में चंपाई सोरेन (झामुमो) 57156, लक्ष्मण टुडु (भाजपा) 53190, अंतर : 3246, वर्ष 2014 में चंपाई सोरेन (झामुमो) 94746, गणेश महाली (भाजपा) 93631, अंतर : 1115, वर्ष 2019 में चंपाई सोरेन (झामुमो) 111554, गणेश महाली (भाजपा) 95887, अंतर : 15667.
24 साल बाद सरायकेला में लौटा भाजपा : भले ही सरायकेला सीट से चंपाई सोरेन लगातार पांचवी बार विधायक बने हो, लेकिन चंपाई सोरेन के बहाने भाजपा 24 साल बाद सरायकेला विस में वापस लौटा है. इससे पूर्व वर्ष 2000 में अनंतराम टुडू सरायकेला से विधायक बने थे. इसके बाद 2005 से लगातार चंपाई सोरेन विधायक बनते आ रहे है. चंपाई सोरेन ने जीत दर्ज कर साबित कर दिया कि सरायकेला में झामुमो से चंपाई की पहचान नहीं थी, बल्कि चंपाई सोरेन के बदौलत झामुमो की पहचान बनी थी.
कैंची ने खेल बिगाड़ा : इस बार तीसरी पार्टी बनकर चुनावी मैदान में उतरी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) कैंची छाप ने विधानसभा चुनाव में कई प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ा. यही हाल सरायकेला विधानसभा क्षेत्र में भी देखने को मिला. सरायकेला में जेएलकेएम प्रत्याशी प्रेम मार्डी को 40056 मतदाताओं का समर्थन मिला. माना जा रहा है कि अगर जेएलकेएम चुनावी मैदान में नहीं होता तो शायद हार-जीत का अंतर कम होता, लेकिन कैंची ने बड़ी आंकड़ों का मत हासिल कर खेल बिगाड़ दिया.
निर्दलीयों से अधिक वोट नोटा को : सरायकेला विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीयों से ज्यादा वोट नोटा के पक्ष में पड़े. सरायकेला से कुल 13 प्रत्याशी मैदान में थे. इस दौरान निर्दलीय प्रत्याशियों को अधिकतम डेढ़ हजार से अधिक वोट नहीं पड़े, जबकि नोटा को 3482 मत प्राप्त हुए. इसकी काफी चर्चा हो रही है.
