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सरायकेला-खरसावां, झारखंड. आदिवासी समाज के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक सोहराय व बांदना की तैयारी गांवों में पूरी कर ली गयी.
लोग इस त्योहार को धूमधाम से मनाने के लिए घर आंगन की रंगायी-पुतायी का कार्य में अंतिम दिन तक जुटे रहे. तीन दिन तक चलने वाले इस त्योहार को मनाने के लिए लोगों द्वारा सारी व्यवस्थाएं कर ली गयी है.
महिलाएं घर की साफ-सफाई, रंग-रोगन में अंतिम दिन तक सक्रिय रहे. वांदना पर्व को लेकर ग्रामीण 15 दिनों से ही तैयारी शुरू कर देते है.
इस दौरान ग्रामीण युवा व महिलाएं काफी मेहनत से घरों की साफ-सफाई व दीवारों में रंग-रोगन करते है. उनके द्वारा दीवारों में की जाने वाली कलाकृति लोगों के लिए आकर्षक का केंद्र होता है.
इस बीच कई घरों में सोहराय व बांदना पर्व से जुड़ी कलाकृति लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, जिसमें पशुधन की पूजा-अर्चना से गोरू खूंटा तक की प्रथा को दर्शाया गया है.
